विदेश से भारत आए 58 हज़ार लोगों में कितने कोरोना पॉज़िटिव हैं?

कोरोना वायरस के खतरे के चलते इंटरनैशनल फ्लाइट्स बंद हैं. विदेशों में फंसे भारतीयों के वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ने वंदे भारत मिशन चलाया था. इस मिशन के तहत 58 हज़ार से ज्यादा भारतीय वापस लाए गए. अब इन सबकी कोरोना वायरस रिपोर्ट आ गई है. केंद्र सरकार ने इसकी जानकारी बॉम्बे हाईकोर्ट में दी है.

क्या-क्या बताया सरकार ने?

– कुल 58,867 भारतीय विदेशों से रेस्क्यू किये गए.
– इनमें से 227 की कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है. यानी करीब 0.38 प्रतिशत लोग.

सरकार ने ये भी कहा कि ये मामले इन लोगों के क्वारंटीन रहने के दौरान ही सामने आ गए थे. और यह कहा नहीं जा सकता है कि ये लोग फ्लाइट में बैठने के बाद कोरोना पॉज़िटिव हुए.

दरअसल हाई कोर्ट ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) और एयर इंडिया से ऐसे लोगों की डिटेल मांगी थी जो फ्लाइट में चढ़ने के बाद वायरस से इनफेक्ट हुए. इसके लिए हरेक राज्य की अलग डिटेल कोर्ट के सामने पेश की गई.

इन्हें देखने के बाद हाई कोर्ट ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री की एक्सपर्ट कमिटी से सवाल किया. क्या केवल किसी कोरोना पॉज़िटिव व्यक्ति के दूसरे को छू देने से कोरोना फैल सकता है? कमिटी ने जवाब दिया कि अगर फ्लाइट में पास बैठे हुए लोगों को सुरक्षात्मक चारों तरफ से ढकने वाला गाउन दे दिया जाए, तो ड्रॉप्लेट या छूने की वजह से वायरस का फैलना रोका जा सकता है.

जस्टिस एसजे कथावला और जस्टिस एसपी तावड़े की डिवीज़न बेंच एयर इंडिया के पायलट देवेन कनानी की अर्ज़ी पर केस सुन रही थी. कोर्ट की कार्यवाही वीडियो कॉन्फरेंस के जरिए चल रही थी. देवेन कनानी की तरफ से एडवोकेट अभिलाष पणिकर ने कहा कि ऑथॉरिटीज़ ने दिल्ली, महाराष्ट्र और तेलंगाना में पहुंचे 18896 यात्रियों में से कोरोना पॉज़िटिव पाए गए लोगों के आंकड़े नहीं दिए हैं.

क्या है मामले का बैकग्राउंड?

देवेन कनानी ने अपनी अर्ज़ी में आरोप लगाया था कि विदेशों में फंसे हुए इंडियंस को वापस लाते हुए इन स्पेशल फ्लाइट्स पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा. उन्होंने कोर्ट का ध्यान केंद्र सरकार की 23 मार्च की नोटिफिकेशन की तरफ खींचा, जिसमें महामारी की वजह से विदेशों में फंसे हुए इंडियंस को वापस लाने के लिए कुछ शर्तें रखी गई थीं. उन्होंने बताया कि मिडिल सीट को खाली रखने वाले नियम का पालन नहीं किया गया. इसके लिए उन्होंने सैन फ्रांसिस्को से मुंबई के बीच चली एयर इंडिया की एक फ्लाइट की फोटो भी सबमिट की थी. जिसमें सभी सीटें भरी हुई नज़र आ रही थीं.

एयर इंडिया के वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने इस अर्ज़ी का विरोध किया था. उन्होंने हाई कोर्ट को कहा था कि 23 मार्च वाली नोटिफिकेशन के ऊपर अब केंद्र सरकार का 22 मई का सर्कुलर आ चुका है, जिसमें मिडिल सीट को खाली रखने की बात नहीं कही गई है. लेकिन जस्टिस आर.डी.धानुका और जस्टिस अभय आहूजा ने इस बात पर गौर किया कि 22 मई वाला सर्कुलर केवल डोमेस्टिक फ्लाइट के लिए है, न कि इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए. उन्होंने एयर इंडिया और DGCA से लिखित जवाब मांगा था कि मिडिल सीट को खाली क्यों नहीं रखा जा रहा?

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